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Friday, October 14, 2016

राष्ट्रभक्ति के कवियों द्वारा भारतीय सेना को समर्पित काव्य कौमुदी “हुंकार” अक्टूबर 14, 2016


संस्कार भारती द्वारा कनॉट प्लेस  सेंट्रल पार्क के प्रांगण में शरद  काव्योत्सव "हुंकारकाआयोजन किया जायेगा
 राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कवियों द्वारा  भारतीय सेना को समर्पित काव्य कौमुदी “हुंकार”
 नई दिल्ली अक्टूबर 14, 2016: आगामी  सोमवार  दिनांक 17 अक्टूबर सांय 4 बजे से कैनॉट प्लेस  स्थित  सेंट्रल पार्क के प्रांगण में शरदकाव्योत्सव “काव्य कौमुदी - हुंकार "  का  आयोजन किया जायेगा, जिसमें देश भर से कवियों को आमंत्रित किया गया है , इस वर्ष का शरदकाव्योत्सव  भारतीय सेना को समर्पित हैराष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कवियों द्वारा हुंकार भरी जाएगी। 
 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री केसरी नाथ त्रिपाठी राज्यपाल पश्चिम बंगालमाननीय सांसद राज्यसभा श्री आर के सिन्हा रहेंगे कार्यक्रम में आमंत्रित कविगणों में पद्मभूषण गोपाल दास "नीरज", डॉ हरिओम पवारश्री प्रकाश पटेरियासरदार प्रताप फौजदार, डॉ सुरेशअवस्थी, श्री गौरव बंसल, श्रीमती पूनम वर्माश्री मनोज कुमार मनोज, श्री राजेश  चेतनडॉ अनिल चौबेश्री शैलेश "मधुर", डॉ रूचि चतुर्वेदीश्री चरणजीत 'चरण', श्री सचिन अग्रवालएवम  श्री राधाकांत पांडेय आदि कई कवि सूची में हैं। 
 कार्यक्रम के संयोजक कवि गजेन्द्र सोलंकी का कहना है कि संस्कार भारती कला एवं साहित्य की एक अखिल भारतीय संस्था है जो कलाएवं साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति के मूल्यों की प्रतिष्ठा को स्थापित करने  का कार्य करती है एवं साहित्यसंगीतनाटकनृत्यचित्रकारीरंगोलीलोककलास्थापित्य कला आदि अष्ट  विधाओं के संवर्धन एवं सरंक्षण का कार्य करती है। संस्कार भारती  दिल्ली लोगो से अधिक से अधिक संख्या  में आकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने का निवेदन करती है। 
 शरद काव्योत्सव एक अखिल भारतीय काव्य साहित्य यज्ञ है जो प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा एवं वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित किया जाता है। अनेक कला एवं साहित्य जगत के कलाकार   साहित्यकार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से संस्कार भारती के साथ जुड़े हुए हैंजो भारत की परम्परागत कलाओं  के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। 
 संस्कार भारती लघु परिचय:
 संस्कार भारती की स्थापना ललित कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना लाने का उद्देश्य सामने रखकर की गयी थी। इसकी पृष्ठभूमि में भाऊरावदेवरसहरिभाऊ वाकणकरनानाजी देशमुखमाधवराव देवले और योगेन्द्र जी जैसे मनीषियों का चिन्तन तथा अथक परिश्रम था। १९५४ से संस्कार भारती की परिकल्पना विकसित होती गयी और १९८१ में लखनऊ में इसकी विधिवत स्थापना हुई। सा कला या विमुक्तये अर्थात्"कला वह है जो बुराइयों के बन्धन काटकर मुक्ति प्रदान करती हैके घोष-वाक्य के साथ आज देशभर में संस्कार भारती की १२०० सेअधिक इकाइयाँ कार्य कर रही हैं। 
समाज के विभिन्न वर्गों में कला के द्वारा राष्ट्रभक्ति एवं योग्य संस्कार जगानेविभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण  नवोदित कलाकारों को प्रोत्साहन देकर इनके माध्यम से सांस्कृतिक प्रदूषण रोकने के उद्देश्य से संस्कार भारती कार्य कर रही है। १९९० से संस्कार भारती के वार्षिकअधिवेशन "कला साधक संगमके रूप में आयोजित किये जाते हैं जिनमें संगीतनाटकचित्रकलाकाव्यसाहित्य और नृत्य विधाओं से जुड़े देशभर के स्थापित  नवोदित कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। 
भारतीय संस्कृति के उत्कृष्ट मूल्यों की प्रतिष्ठा करने की दृष्टि से राष्ट्रीय गीत प्रतियोगिताकृष्ण रूप-सज्जा प्रतियोगिताराष्ट्रभावना जगाने वालेनुक्कड़ नाटकनृत्यरंगोलीमेंहदीचित्रकलाकाव्य-यात्रास्थान-स्थान पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आदि बहुविध कार्यक्रमों का आयोजन संस्कार भारती द्वारा किया जाता है।
मीडिया संपर्क
बृजेश भट्ट
संस्कार भारती के लिए
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प्रेरक राष्ट्र नायको का यशगान -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS - तिलक संपादक
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